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टाइपिंग और शॉर्टहैंड टेस्ट

अभ्यास -02

Hindi (हिंदी)

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माननीय अध्यक्ष महोदयऎ मैं इस उच्च सदन के माध्यम से देश की वर्तमान आर्थिकऎ सामाजिक एवं प्रशासनिक परिस्थितियों पर अपना विचार व्यक्त करना चाहता हूँ। यह सर्वविदित है कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके नीतिगत निर्णयोंऎ प्रशासनिक दक्षता तथा संसाधनों के समुचित प्रबंधन पर निर्भर करती है। तथापिऎ वर्तमान परिदृश्य में यह देखा जा रहा है कि विकास की प्रक्रिया में कई प्रकार की संरचनात्मक विसंगतियाँ उत्पन्न हो गई हैंऎ जो समग्र प्रगति में बाधा उत्पन्न कर रही हैं। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियाँ अत्यंत जटिल एवं परिवर्तनशील हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरताऎ ऊर्जा संसाधनों की अनिश्चितता तथा भू-राजनीतिक तनावों ने विश्व अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। इसका प्रत्यक्ष प्रभाव हमारे देश की आर्थिक संरचना पर भी पड़ा है। महंगाई दर में वृद्धिऎ रोजगार के अवसरों में कमी तथा उत्पादन क्षेत्र में गिरावट जैसी समस्याएँ आम नागरिकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। यह आवश्यक है कि सरकार एक समन्वित एवं दूरदर्शी आर्थिक नीति अपनाएऎ जिससे विकास की प्रक्रिया को संतुलित एवं समावेशी बनाया जा सके। विशेष रूप सेऎ लघु एवं मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहन देने की आवश्यकता हैऎ क्योंकि ये उद्योग रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अतिरिक्तऎ निवेश को आकर्षित करने के लिए नीतिगत स्थिरता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी अत्यंत आवश्यक है। माननीय सदस्यगणऎ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिति पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। कृषि क्षेत्रऎ जो हमारे देश की अर्थव्यवस्था का आधार हैऎ अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है। सिंचाई सुविधाओं की कमीऎ आधुनिक तकनीकों का अभाव तथा विपणन तंत्र की जटिलता किसानों की आय को प्रभावित कर रही है। यदि इन समस्याओं का समाधान समयबद्ध तरीके से नहीं किया गयाऎ तो इसका दीर्घकालिक प्रभाव राष्ट्रीय विकास पर पड़ेगा। शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में अनेक प्रयास किए गए हैंऎ किंतु अभी भी अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो सके हैं। विद्यालयों में आधारभूत संरचना की कमीऎ प्रशिक्षित शिक्षकों का अभाव तथा डिजिटल संसाधनों की सीमित उपलब्धता इस क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियाँ हैं। उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता हैऎ ताकि देश की बौद्धिक क्षमता को सुदृढ़ किया जा सके। स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं का अभाव लोगों के लिए गंभीर समस्या उत्पन्न कर रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक संसाधनों की कमी तथा प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों का अभाव स्थिति को और अधिक जटिल बना देता है। अतः यह अपेक्षित है कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश बढ़ाए तथा एक समग्र एवं प्रभावी स्वास्थ्य नीति का निर्माण करे। पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में यह कहना उचित होगा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है। औद्योगिकीकरण एवं शहरीकरण के कारण वायु एवं जल प्रदूषण में निरंतर वृद्धि हो रही है। वनों की कटाई तथा प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन ने पारिस्थितिक संतुलन को प्रभावित किया है। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गयाऎ तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। माननीय अध्यक्ष महोदयऎ प्रशासनिक तंत्र में सुधार की आवश्यकता भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। पारदर्शिताऎ उत्तरदायित्व तथा दक्षता को सुनिश्चित करने के लिए ई-गवर्नेंस एवं डिजिटल तकनीकों का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। तथापिऎ डिजिटल विभाजन एवं साइबर सुरक्षा से संबंधित चुनौतियाँ इस दिशा में बाधा उत्पन्न करती हैं। अतः यह आवश्यक है कि इन समस्याओं के समाधान हेतु ठोस रणनीति तैयार की जाए। राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में भी सतर्कता एवं समन्वय की आवश्यकता है। आंतरिक एवं बाह्य दोनों प्रकार की चुनौतियों का सामना करने के लिए एक सशक्त एवं प्रभावी सुरक्षा तंत्र का निर्माण अनिवार्य है। इसके साथ हीऎ युवाओं को सकारात्मक दिशा में प्रेरित करना भी उतना ही आवश्यक हैऎ ताकि वे राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकें। महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। महिलाओं को शिक्षाऎ स्वास्थ्य एवं रोजगार के क्षेत्र में समान अवसर प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है। समाज में व्याप्त लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए तथा कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। डिजिटल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तीव्र प्रगति ने शासन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में नए अवसर प्रदान किए हैं। डिजिटल सेवाओं के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। किंतु डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण अभी भी कई लोग इन सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। अतः यह आवश्यक है कि डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए तथा तकनीकी अवसंरचना को सुदृढ़ किया जाए। अंततःऎ मैं यह कहना चाहूँगा कि राष्ट्र के समग्र विकास के लिए एक समन्वित एवं बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। सरकारऎ प्रशासन एवं जनता के बीच समुचित तालमेल स्थापित कर ही हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। पारदर्शिताऎ ईमानदारी एवं कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य करते हुए हम देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर कर सकते हैं।